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नज़्मी सिकंदराबादी

दिल्ली, भारत

ग़ज़ल 2

 

शेर 2

डरेंगे लोग वफ़ा के ख़याल से 'नज़मी'

मिरी वफ़ाओं का जिस दिन सिला मिलेगा मुझे

नसीब होंगी उसे कामयाबियाँ 'नजमी'

ख़ुशी के साथ जो हर इम्तिहाँ से गुज़रेगा

 

पुस्तकें 2

Hisar-e-Fikr

 

1995

Karb-e-Ehsas

 

1988

 

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