ग़ज़ल 5

 

शेर 6

जिस को दिल से लगा के रक्खा था

वो ख़ज़ाना लुटा गए आँसू

होश आया तो कहीं कुछ भी था

हम भी किस बज़्म में जा बैठे थे

दश्त गुलज़ार हुआ जाता है

क्या यहाँ अहल-ए-वफ़ा बैठे थे

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