सलमान सईद
ग़ज़ल 19
नज़्म 2
अशआर 15
आप के हाथ में है मुझ से त'अल्लुक़ का रेमोट
आप चाहें तो ये चैनल भी बदल सकते हैं
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पहले फिल्में भी हक़ीक़त की तरह होती थीं
अब हक़ीक़त में भी फ़िल्मों की तरह होता है
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फ़क़त ये लकड़ी नहीं है तुम्हारी बैसाखी
शजर के हाथ कटे हैं इसे बनाने में
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