ग़ज़ल 23

शेर 28

हैरत से तकता है सहरा बारिश के नज़राने को

कितनी दूर से आई है ये रेत से हाथ मिलाने को

जान है तो जहान है दिल है तो आरज़ू भी है

इशक़ भी हो रहेगा फिर जान अभी बचाइए

मुझे ये सारे मसीहा अज़ीज़ हैं लेकिन

ये कह रहे हैं कि मैं तुम से फ़ासला रक्खूँ

पुस्तकें 2

Barish

 

 

Qaus

 

1997

 

"कराची" के और शायर

  • जौन एलिया जौन एलिया
  • सीमाब अकबराबादी सीमाब अकबराबादी
  • अनवर शऊर अनवर शऊर
  • सज्जाद बाक़र रिज़वी सज्जाद बाक़र रिज़वी
  • सलीम कौसर सलीम कौसर
  • मोहसिन एहसान मोहसिन एहसान
  • दिलावर फ़िगार दिलावर फ़िगार
  • अज़रा अब्बास अज़रा अब्बास
  • जमाल एहसानी जमाल एहसानी
  • अदा जाफ़री अदा जाफ़री