noImage

शमीम फ़ारूक़ी

1943 | पटना, भारत

शमीम फ़ारूक़ी

ग़ज़ल 9

शेर 2

हसीन रुत है मगर कौन घर से निकलेगा

हर इक बदन में समाया हुआ है डर अब के

  • शेयर कीजिए

दूर तक फैला हुआ है एक अन-जाना सा ख़ौफ़

इस से पहले ये समुंदर इस क़दर बरहम था

  • शेयर कीजिए
 

पुस्तकें 4

हाली फ़न और शख़्सियत

 

1986

Muslim Siyasat Ka Daur-e-Jadeed

 

1940

Shaheed-e-Insaniyat Nasir

 

1971

Zaiqa Mere Lahoo Ka

 

1987

 

"पटना" के और शायर

  • मुबारक अज़ीमाबादी मुबारक अज़ीमाबादी
  • शाद अज़ीमाबादी शाद अज़ीमाबादी
  • सुल्तान अख़्तर सुल्तान अख़्तर
  • आलम ख़ुर्शीद आलम ख़ुर्शीद
  • खुर्शीद अकबर खुर्शीद अकबर
  • हसन नईम हसन नईम
  • मुनीर सैफ़ी मुनीर सैफ़ी
  • इम्दाद इमाम असर इम्दाद इमाम असर
  • हसरत अज़ीमाबादी हसरत अज़ीमाबादी
  • अरमान नज्मी अरमान नज्मी