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उनवान चिश्ती

1935 - 2004 | दिल्ली, भारत

ग़ज़ल 14

शेर 9

वो हादसे भी दहर में हम पर गुज़र गए

जीने की आरज़ू में कई बार मर गए

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इश्क़ फिर इश्क़ है आशुफ़्ता-सरी माँगे है

होश के दौर में भी जामा-दरी माँगे है

आप से चूक हो गई शायद

आप और मुझ पे मेहरबाँ क्या ख़ूब

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ई-पुस्तक 22

Akhbaron Ke Beech

 

1998

Aroozi Aur Fanni Masail

 

1985

Azadi Ke Baad Dehli Mein Urdu Ghazal

 

1989

Azadi Ke Bad Delhi Mein Urdu Ghazal

 

2009

चाँद चकोर और चाँदनी

 

1998

Harf-e-Barhana

 

1989

Islah Nama

Volume-001

1997

मकातीब-ए-अहसन

खण्ड-001

1977

Makateeb-e-Ahsan

 

1983

Manviyat Ki Talash

 

1983

ऑडियो 6

इश्क़ फिर इश्क़ है आशुफ़्ता-सरी माँगे है

किसी के फ़ैज़-ए-क़ुर्ब से हयात अब सँवर गई

जब ज़ुल्फ़ शरीर हो गई है

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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