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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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यावर अली

ग़ज़ल 9

नज़्म 1

 

अशआर 2

देर तक मैं उसे सीने से लगाए रक्खूँ

कोई इस वक़्त की रफ़्तार को धीमा कर दे

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ये हमेशा सही दिखलाए ज़रूरी भी नहीं

आइना भी कभी हो जाता है धुँधला 'यावर'

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