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ज़हीर रहमती

1968 | दिल्ली, भारत

ग़ज़ल 9

शेर 10

जिस की कुछ ताबीर हो

ख़्वाब उसी को कहते हैं

ख़ुशी से अपना घर आबाद कर के

बहुत रोएँगे तुम को याद कर के

और एहसास-ए-जिहालत बढ़ गया

किस क़दर पढ़ लिख के जाहिल हो गए

पुस्तकें 1

Ghazal Ki Tanqeed Ki Istilahat

 

2005

 

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