Zia-ul-Haq Qasmi's Photo'

ज़ियाउल हक़ क़ासमी

पाकिस्तान

ज़ियाउल हक़ क़ासमी के शेर

मुझे अपनी बीवी पे फ़ख़्र है मुझे अपने साले पे नाज़ है

नहीं दोश दोनों का इस में कुछ मुझे डाँटता कोई और है

मिरे रोब में तो वो गया मिरे सामने तो वो झुक गया

मुझे लात खा के हुई ख़बर मुझे पीटता कोई और है

वो भरी बज़्म में कहती है मुझे अंकल-जी

डिप्लोमेसी है ये कैसी मिरी हम-साई की

सर-ए-बज़्म मुझ को उठा दिया मुझे मार मार लिटा दिया

मुझे मारता कोई और है वले हाँफ्ता कोई और है

मैं जिसे हीर समझता था वो राँझा निकला

बात निय्यत की नहीं बात है बीनाई की