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विषय
फ़ख्र
फ़ख्र शायरी
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मर्सिया
दौड़ीं ये कह के फ़ातिमा-ज़ेहरा जिगर-फ़िगार
है है हुसैन क्या हुआ तू क्यूँ है अश्क-बार
मीर अनीस
ग़ज़ल
दर्द-ए-दिल लिखूँ कब तक जाऊँ उन को दिखला दूँ
उँगलियाँ फ़िगार अपनी ख़ामा ख़ूँ-चकाँ अपना
मिर्ज़ा ग़ालिब
नज़्म
ख़िज़्र-ए-राह
ता ये चिंगारी फ़रोग़-ए-जावेदाँ पैदा करे
ख़ाक-ए-मशरिक पर चमक जाए मिसाल-ए-आफ्ताब
अल्लामा इक़बाल
शेर
आने वाली नस्लें तुम पर फ़ख़्र करेंगी हम-असरो
जब भी उन को ध्यान आएगा तुम ने 'फ़िराक़' को देखा है
फ़िराक़ गोरखपुरी
नज़्म
मिर्ज़ा 'ग़ालिब'
दफ़्न तुझ में कोई फ़ख़्र-ए-रोज़गार ऐसा भी है
तुझ में पिन्हाँ कोई मोती आबदार ऐसा भी है
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
ये तुलू-ए-रोज़-ए-मलाल है सो गिला भी किस से करेंगे हम
कोई दिलरुबा कोई दिल-शिकन कोई दिल-फ़िगार कहाँ रहा
अदा जाफ़री
ग़ज़ल
मुझे फ़ख़्र है इसी पर ये करम भी है मुझी पर
तिरी कम-निगाहियाँ भी मुझे क्यूँ न हों गवारा
शकील बदायूनी
नज़्म
उस्ताद-ए-मोहतरम को मेरा सलाम कहना
काँटे भी राह में हैं फूलों की अंजुमन भी
तुम फ़ख़्र-ए-क़ौम बनना और नाज़िश-ए-वतन भी









