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विषय
फ़ख्र
फ़ख्र शायरी
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ग़ज़ल
दर्द-ए-दिल लिखूँ कब तक जाऊँ उन को दिखला दूँ
उँगलियाँ फ़िगार अपनी ख़ामा ख़ूँ-चकाँ अपना
मिर्ज़ा ग़ालिब
शेर
आने वाली नस्लें तुम पर फ़ख़्र करेंगी हम-असरो
जब भी उन को ध्यान आएगा तुम ने 'फ़िराक़' को देखा है
फ़िराक़ गोरखपुरी
ग़ज़ल
ये तुलू-ए-रोज़-ए-मलाल है सो गिला भी किस से करेंगे हम
कोई दिलरुबा कोई दिल-शिकन कोई दिल-फ़िगार कहाँ रहा









