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नज़्म
जुगनू
वो माँ जो देखते ही मुझ को मुस्कुरा न सकी
कभी जो मुझ से मिठाई छुपा के रख न सकी
फ़िराक़ गोरखपुरी
ग़ज़ल
आमिर अमीर
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नज़्म
बच्चों की क़व्वाली
थोड़ी सी मिठाई ताक़ पे थी मुट्ठी में चुराए बैठे हैं
अब्बू के भगाए भागे थे अम्मी के बुलाए बैठे हैं
शौकत परदेसी
ग़ज़ल
क्या ज़ौक़-ए-इबादत हो उन को जो बस के लबों के शैदा हैं
हलवा-ए-बहिश्ती एक तरफ़ होटल की मिठाई एक तरफ़
अकबर इलाहाबादी
शेर
बुल-हवस गो करें तेरे लब-ए-शीरीं पर हुजूम
तल्ख़ मत हो कि मिठाई से मगस आती है
शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम
नज़्म
ईद की ख़रीदारी
मियाँ बीवी चले बाज़ार को बहर-ए-ख़रीदारी
मिठाई फल सिवय्याँ इत्र जूते गोश्त तरकारी













