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ग़ज़ल
आमिर अमीर
नज़्म
दरख़्त-ए-ज़र्द
न जाने वक़्त की पैकार में तुम किस तरफ़ होगे
है रन ये ज़िंदगी इक रन जो बरपा लम्हा लम्हा है
जौन एलिया
फ़िल्मी गीत
कह रही है हर नज़र बंदा-पर्वर शुक्रिया
हँस के अपनी ज़िंदगी में कर लिया शामिल मुझे
राजा मेहदी अली ख़ाँ
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विषय
पारसाई
पारसाई शायरी
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ग़ज़ल
बे-नियाज़ी हद से गुज़री बंदा-पर्वर कब तलक
हम कहेंगे हाल-ए-दिल और आप फ़रमावेंगे क्या
मिर्ज़ा ग़ालिब
नज़्म
नौ-जवान ख़ातून से
हिजाब-ए-फ़ित्ना-परवर अब उठा लेती तो अच्छा था
ख़ुद अपने हुस्न को पर्दा बना लेती तो अच्छा था
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
तस्वीर-ए-दर्द
शराब-ए-बे-ख़ुदी से ता-फ़लक परवाज़ है मेरी
शिकस्त-ए-रंग से सीखा है मैं ने बन के बू रहना
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
जश्न-ए-ग़ालिब
तुर्बत है कहाँ उस की मस्कन था कहाँ उस का
अब अपने सुख़न-परवर ज़ेहनों में सवाल आया
साहिर लुधियानवी
नज़्म
एक लड़का
वो आशुफ़्ता-मिज़ाज अंदोह-परवर इज़्तिराब-आसा
जिसे तुम पूछते रहते हो कब का मर चुका ज़ालिम












