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नज़्म
माथे का झूमर
ये बैल पिचक जाएगा सोचा नहीं मैं ने
अब कुचला गया पीसा गया मेरे बदन से
अब्दुल क़ादिर
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piichhaa
पीछा پِیچھا
किसी चीज के पीछे की ओर का विस्तार। मुहा०-(किसी का) पोछा करना = (क) किसी को पकड़ने, भागने, मारने-पीटने आदि के लिए अथवा उसका पता लगाने या भेद लेने के लिए उसके पीछे-पीछे तेजी से चलना या दौड़ना। जैसे-अपराधी, चोर या शिकार का पीछा करना। (घ) किसी का भेद या रहस्य जानने के लिए छिपकर उसके पीछे-पीछे चलना। जैसे-वह जहाँ जाता था, वहीं पुलिस उसका पीछा करती थी। (ग) दे० नीचे ' पीछा पकड़ना '। (किसी काम या बात से) पीछा छुड़ाना अपने साथ होनेवाली किसी अनिष्ट या अप्रिय बात से अपना सम्बन्ध छुड़ाना। पिंड छुड़ाना। जैसे-अफीम या शराब की लत से पीछा छुड़ाना। (किसी व्यक्ति से) पोछा छुड़ाना-जो व्यक्ति किसी काम या बात के लिए पीछे पड़कर बहुत तंग कर रहा हो, उससे किसी प्रकार छुटकारा पाना। पीछा छूटना = (क) पीछा करनेवाले या पीछे पड़े हुए व्यक्ति से छुटकारा मिलना। पिंड छूटना। जान छूटना। (ख) अनिष्ट अथवा अप्रिय काम या बात से छुटकारा मिलना (ग)। किसी प्रकार का या किसी रूप में छुटकारा मिलना। बचाव या रक्षा होना। जैसे-महीनों बाद बुखार से पीछा छटा है। (किसी व्यक्ति का) पीछा छटना = किसी का पीछा करने का काम बंद करना। किसी आशा या प्रयोजन से किसी के साथ लगे फिरने या उसके पीछे-पीछे दौड़ने या उसे तंग करने का काम बंद करना। (किसी काम या बात का) पीछा छोड़ना = जिस काम या बात में बहुत अधिक उत्साह या तन्मयता से लगे रहे हों, उससे विरत होना अथवा उसका आसंग या ध्यान छोड़ना। पीछा दिखाना = (क) सम्मुख या साथ न रहकर अलग या दूर हो जाना। पीठ दिखाना। जैसे-संकट के समय संगी साथियों ने भी पीछा दिखाया। (ख) प्रतियोगिता, लड़ाई-झगड़े आदि में डर या हारकर भाग जाना। पीठ दिखाना। पीछा देना = (दे० ऊपर पीछा दिखाना '। (किसी का) पीछा पकड़ना = किसी आशा से या अपने कोई उद्देश्य सिद्ध करने के लिए किसी का अनुचर या साथी बनना। किसी के आश्रय या सहायता का आकांक्षी बनकर प्रायः उसके साथ लगे रहना। जैसे-किसी रईस का पीछा पकड़ना। (किसी काम या बात का) पीछा भारी होना = (क) पीछे की ओर शत्रु या संकट की आशंका या भय होना। (ख) अधिक उपयोगी या सहायक अंश का पीछे की ओर आधिक्य होना। (ग) किसी काम के अंतिम या शेष अंश का अधिक कठिन या अधिक कष्टसाध्य होना। पिछला अंश ऐसा होना कि सँभलना कठिन हो।
pichhaa.ii
पिछाई پِچھائی
پیچھے کی طرف کا ، پچھلا ؛ اگائی کے بالمقابل (رک : پچھائی دھوک ، پچھائی گھسا) .
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ग़ज़ल
शौक़ से राह-ए-मोहब्बत की मुसीबत झेल ले
इक ख़ुशी का राज़ पिन्हाँ जादा-ए-मंज़िल में है
बिस्मिल अज़ीमाबादी
नज़्म
एक आरज़ू
पिछले पहर की कोयल वो सुब्ह की मोअज़्ज़िन
मैं उस का हम-नवा हूँ वो मेरी हम-नवा हो
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
इशक़-ए-पेचाँ की संदल पर जाने किस दिन बेल चढ़े
क्यारी में पानी ठहरा है दीवारों पर काई है
जौन एलिया
नज़्म
दरख़्त-ए-ज़र्द
मगर दोज़ख़ पिघल जाए जो मेरे साँस अपना ले
तुम अपनी माम के बेहद मुरादी मिन्नतों वाले
जौन एलिया
नज़्म
मिरे हमदम मिरे दोस्त!
कैसे मग़रूर हसीनाओं के बरफ़ाब से जिस्म
गर्म हाथों की हरारत में पिघल जाते हैं








