aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "real"
चौराहे बाग़ बिल्डिंगें सब शहर तो नहींकुछ ऐसे वैसे लोगों से याराना चाहिए
पहुँचा जो तेरे दर पे तो महसूस ये हुआलम्बी सी एक क़तार में जैसे खड़ा हूँ मैं
ये तू ने कहा क्या ऐ नादाँ फ़य्याज़ी-ए-क़ुदरत आम नहींतू फ़िक्र ओ नज़र तो पैदा कर क्या चीज़ है जो इनआम नहीं
फ़हमीदा रियाज़
1946 - 2018
शायर
रियाज़ मजीद
born.1942
आमिर रियाज़
born.1993
मुस्कान सय्यद रियाज़
born.1987
रियाज़ नज्म
born.1981
रियाज़ हान्स
born.1970
रियाज़ हनफ़ी
born.1960
दफ़्तर रिसाला-ए-अतालीक़, हैदराबाद दकन
पर्काशक
रियाज़ राही
born.1968
आज़र रियाज़
रियर प्रिंटर्ज़, हैदराबाद
मतबा फ़ैज़े-रियाज़, बिजनोर
रियाज़ हिन्द प्रेस, अलीगढ़
रियाज़ अहमद
लेखक
जन्नत और जहन्नम का रेल खेल दिखलाएइक डब्बे में आग रहे दूजा बर्फ़ जमाए
अब सो जाओऔर अपने हाथ को मेरे हाथ में रहने दो
कुछ लोग तुम्हें समझाएँगेवो तुम को ख़ौफ़ दिलाएँगे
वक़्त ख़ुश ख़ुश काटने का मशवरा देते हुएरो पड़ा वो आप मुझ को हौसला देते हुए
जब अगले साल यही वक़्त आ रहा होगाये कौन जानता है कौन किस जगह होगा
महिलाओं की आत्मकथाओं का चयन
रेख़्ता ने अपने पाठकों के अनुभव से, प्राचीन और आधुनिक कवियों की उन पुस्तकों का चयन किया है जो सबसे अधिक पढ़ी जाती हैं.
रूसी साहित्य का उर्दू में अनुवाद यहाँ पढ़े.
रि'आرِعا
गड़रिया, रखवाला, निगरानी करने वाला
railrail
गाड़ी से भेजना
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सच
Urdu Mein Naat Goi
Rijal-e-Iqbal
अब्दुर रऊफ़ उरूज
स्केच / ख़ाका
How To Read Iqbal?
शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी
इक़बालियात तन्क़ीद
Sab Laal-o-Guhar
कुल्लियात
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नज़्म
Badan Dareeda
कविता
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Doobte Badan Ka Hath
Fann-e-Asma-ur-Rijal
तक़ीउद्दीन नदवी मज़ाहिरी
इस्लामियात
Meri Nazmein
Patthar Ki Zaban
Guzre Waqton Ki Ibarat
ग़ज़ल
कुव्वात-अल-रिजाल
हाफिज़ सय्यद शाह उमर अली करार कादरी
तिब्ब-ए-यूनानी
Rijal-e-Bukhari
मिर्ज़ा अब्दुल हुसैन
किस से अब आरज़ू-ए-वस्ल करेंइस ख़राबे में कोई मर्द कहाँ
बैठा है मेरे सामने वोजाने किसी सोच में पड़ा है
तुम बिल्कुल हम जैसे निकलेअब तक कहाँ छुपे थे भाई
ये पैरहन जो मिरी रूह का उतर न सकातो नख़-ब-नख़ कहीं पैवस्त रेशा-ए-दिल था
कोई दीनार न दिरहम न रियाल अच्छा हैजो ज़रूरत में हो मौजूद वो माल अच्छा है
मिरी बेबसी मुझ पे ज़ाहिर है लेकिनतुम्हारी तमन्ना तुम्हारी तमन्ना
जो मुझ में छुपा मेरा गला घोंट रहा हैया वो कोई इबलीस है या मेरा ख़ुदा है
मुद्दत से ये आलम है दिल का हँसता भी नहीं रोता भी नहींमाज़ी भी कभी दिल में न चुभा आइंदा का सोचा भी नहीं
पत्थर से विसाल माँगती हूँमैं आदमियों से कट गई हूँ
रणभूमी में लड़ते लड़ते मैं ने कितने सालइक दिन जल में छाया देखी चट्टे हो गए बाल
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