aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "taabish"
मिरी ज़िंदगी महरम-ए-ग़म है 'ताबिश'नफ़स को ब-रंग-ए-फ़ुग़ाँ देखता हूँ
जुनूँ और अहल-ए-जुनूँ का वो क़हत है 'ताबिश'उठा न दश्त से फिर कोई नारा-ए-याहू
अब्बास ताबिश
born.1961
शायर
ज़ुबैर अली ताबिश
born.1987
ताबिश देहलवी
1911 - 2004
तौसीफ ताबिश
born.1989
ऐन ताबिश
born.1958
ताबिश मेहदी
1951 - 2025
फ़ज़्ल ताबिश
1933 - 1995
ताबिश कानपुरी
ताबिश कमाल
ज़फ़र ताबिश
born.1957
रोहित सोनी ताबिश
born.1988
सबा ताबिश
born.1999
ज़ुल्फ़ेक़ार अहमद ताबिश
born.1939
लेखक
ताबिश रिहान
born.1986
ताबिश लखनवी
तुम्हें इक बात कहनी थीइजाज़त हो तो कह दूँ मैं
ये मोहब्बत की कहानी नहीं मरती लेकिनलोग किरदार निभाते हुए मर जाते हैं
एक मुद्दत से मिरी माँ नहीं सोई 'ताबिश'मैं ने इक बार कहा था मुझे डर लगता है
एक ही बार नज़र पड़ती है उन पर 'ताबिश'और फिर वो ही लगातार नज़र आते हैं
हम हैं वो टूटी हुई कश्तियों वाले 'ताबिश'जो किनारों को मिलाते हुए मर जाते हैं
तारीख़
प्रख्यात पाकिस्तानी शायर जो मुशायरों में भी लोकप्रिय हैं।
ताबिश تابِش
चमक, रौशनी, नूर अर्थात उजाला
तपिश طَپِش
तपिश تَپِش
(सूरज की किरणों या आग की लिपट से) किसी चीज़ के तपने के फलस्वरूप फैलनेवाला ताप, जैसे: ज़मीन की तपिश, गर्मी, दहन, जलन, सोज़िश, पतन, गरिमा
तबिश تَبِش
तपिश, गर्मी, हरारत , रोशनी
इश्क़-आबाद
कुल्लियात
Agar Main Sher Na Kahta
Aasman
काव्य संग्रह
उर्दू तंक़ीद का सफ़र
Taab-e-Ghazal
Aadmi Udas Hai
नज़्म
Charagh-e-Sehra
Neem Roz
Ghazal Nama
ग़ज़ल
Ilmi Kitabein
कैटलॉग / सूची
Tabish-e-Suhail
इक़बाल सुहैल
Kankar Bolte Hain
Ashk Asa Ne Nahr Nikali
Dasht Ajab Hairani Ka
Taqdees
हँसने नहीं देता कभी रोने नहीं देताये दिल तो कोई काम भी होने नहीं देता
आज तो दिल के दर्द पर हँस करदर्द का दिल दुखा दिया मैं ने
जिस से पूछें तिरे बारे में यही कहता हैख़ूबसूरत है वफ़ादार नहीं हो सकता
वो पास क्या ज़रा सा मुस्कुरा के बैठ गयामैं इस मज़ाक़ को दिल से लगा के बैठ गया
फटा-पुराना ख़्वाब है मेरा फिर भी 'ताबिश'इस में अपना-आप छुपाया जा सकता है
ये 'ताबिश' क्या है बस इक खोटा सिक्कामगर ये खोटा सिक्का चल रहा है
मुद्दत के बाद ख़्वाब में आया था मेरा बापऔर उस ने मुझ से इतना कहा ख़ुश रहा करो
मेरी तन्हाई बढ़ाते हैं चले जाते हैंहंस तालाब पे आते हैं चले जाते हैं
हम हैं सूखे हुए तालाब पे बैठे हुए हंसजो तअल्लुक़ को निभाते हुए मर जाते हैं
अभी हैं क़ुर्ब के कुछ और मरहले बाक़ीकि तुझ को पा के हमें फिर तिरी तमन्ना है
पहले मुफ़्त में प्यास बटेगीबा'द में इक-इक बूँद बिकेगी
मसरूफ़ हैं कुछ इतने कि हम कार-ए-मोहब्बतआग़ाज़ तो कर लेते हैं जारी नहीं रखते
तुम्हारा सिर्फ़ हवाओं पे शक गया होगाचराग़ ख़ुद भी तो जल जल के थक गया होगा
तुम्हारे ग़म से तौबा कर रहा हूँतअ'ज्जुब है मैं ऐसा कर रहा हूँ
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