आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "taake"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "taake"
ग़ज़ल
याद थीं हम को भी रंगा-रंग बज़्म-आराईयाँ
लेकिन अब नक़्श-ओ-निगार-ए-ताक़-ए-निस्याँ हो गईं
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
ताक़-ए-अबरू में सनम के क्या ख़ुदाई रह गई
अब तो पूजेंगे उसी काफ़िर के बुत-ख़ाने को हम
नज़ीर अकबराबादी
पृष्ठ के संबंधित परिणाम "taake"
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
अन्य परिणाम "taake"
नज़्म
मुफ़्लिसी
औरों को आठ सात तो वो दो टके ही पाए
इस लाज से इसे भी लजाती है मुफ़्लिसी
नज़ीर अकबराबादी
ग़ज़ल
तजल्ली चेहरा-ए-ज़ेबा की हो कुछ जाम-ए-रंगीं की
ज़मीं से आसमाँ तक आलम-ए-अनवार हो जाए
असग़र गोंडवी
नज़्म
अपनी मल्का-ए-सुख़न से
हर नक़्श-ए-पा को ताज-ए-गुलिस्ताँ किए हुए
सौ तूर इक निगाह में पिन्हाँ किए हुए
जोश मलीहाबादी
नज़्म
लखनऊ
इक नौ-बहार-ए-नाज़ को ताके है फिर निगाह
वो नौ-बहार-ए-नाज़ कि है जान-ए-लखनऊ
असरार-उल-हक़ मजाज़
ग़ज़ल
सताइश-गर है ज़ाहिद इस क़दर जिस बाग़-ए-रिज़वाँ का
वो इक गुलदस्ता है हम बे-ख़ुदों के ताक़-ए-निस्याँ का
मिर्ज़ा ग़ालिब
नज़्म
बरसात की बहारें
करता है सैर कोई कोठे का ले सहारा
मुफ़्लिस भी कर रहा है पोले तले गुज़ारा







