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नज़्म
जवाब-ए-शिकवा
तब-ए-आज़ाद पे क़ैद-ए-रमज़ाँ भारी है
तुम्हीं कह दो यही आईन-ए-वफ़ादारी है
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
तुलू-ए-इस्लाम
दलील-ए-सुब्ह-ए-रौशन है सितारों की तुनुक-ताबी
उफ़ुक़ से आफ़्ताब उभरा गया दौर-ए-गिराँ-ख़्वाबी
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
बे-ताबी कुछ और बढ़ा दी एक झलक दिखला देने से
प्यास बुझे कैसे सहरा की दो बूँदें बरसा देने से
जलील ’आली’
शेर
तुझ को पा कर भी न कम हो सकी बे-ताबी-ए-दिल
इतना आसान तिरे इश्क़ का ग़म था ही नहीं
फ़िराक़ गोरखपुरी
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रेख़्ता शब्दकोश
taabi'ii
ताबि'ई تابِعی
वह मुसलमान जिसने पैगंबर मुहम्मद के किसी साथी (निकट जन) को देखा हो और उसकी एक मुसलमान के रूप में मृत्यु हो गई हो
tabii'ii
तबी'ई طَبِیعی
एक वैज्ञानिक शाखा जिसमें शारीरिक परिवर्तनों और गुणों का विवरण होता है, शरीर धर्मशास्त्र
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ग़ज़ल
अफ़्सून-ए-तमन्ना से बेदार हुई आख़िर
कुछ हुस्न में बे-ताबी कुछ 'इश्क़ में ज़ेबाई
सूफ़ी ग़ुलाम मुस्ताफ़ा तबस्सुम
ग़ज़ल
तोड़ कर बैठा हूँ राह-ए-शौक़ में पा-ए-तलब
देखना है जज़्बा-ए-बे-ताबी-ए-मंज़िल मुझे
जिगर मुरादाबादी
ग़ज़ल
शकील बदायूनी
ग़ज़ल
न इतना बुर्रिश-ए-तेग़-ए-जफ़ा पर नाज़ फ़रमाओ
मिरे दरिया-ए-बे-ताबी में है इक मौज-ए-ख़ूँ वो भी
मिर्ज़ा ग़ालिब
नज़्म
क़हत-ए-बंगाल
बेदारी-ए-एहसास है हर सम्त नुमायाँ
बे-ताबी-ए-अर्बाब-ए-नज़र देख रहा हूँ
जिगर मुरादाबादी
ग़ज़ल
शिकस्त-ए-रंग-ए-रुख़ आइना-ए-बे-ताबी-ए-दिल है
ज़रा देखो तो क्यूँ कर ग़म-ज़दों का दम निकलता है
सफ़ी लखनवी
उद्धरण
उम्र-ए-तबीई तक तो सिर्फ़ कव्वे, कछुवे, गधे और वो जानवर पहुंचते हैं जिनका खाना शर्अ़न हराम है।...
मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी
ग़ज़ल
समझना फ़हम गर कुछ है तबीई से इलाही को
शहादत ग़ैब की ख़ातिर तो हाज़िर है गवाही को









