ADVERTISEMENT

शुक्रिया पर शेर

शुक्रिया क़ब्र तक पहुँचाने वालो शुक्रिया

अब अकेले ही चले जाएँगे इस मंज़िल से हम

क़मर जलालवी

उस मेहरबाँ नज़र की इनायत का शुक्रिया

तोहफ़ा दिया है ईद पे हम को जुदाई का

अज्ञात

ख़तों को खोलती दीमक का शुक्रिया वर्ना

तड़प रही थी लिफ़ाफ़ों में बे-ज़बानी पड़ी

अज़हर फ़राग़

शुक्रिया तेरा तिरे आने से रौनक़ तो बढ़ी

वर्ना ये महफ़िल-ए-जज़्बात अधूरी रहती

अज्ञात
ADVERTISEMENT

शुक्रिया रेशमी दिलासे का

तीर तो आप ने भी मारा था

मुज़फ़्फ़र हनफ़ी

शुक्रिया वाइज़ जो मुझ को तर्क-ए-मय की दी सलाह

ग़ौर मैं इस पर करूँगा होश में आने के बाद

जलील मानिकपूरी

शुक्रिया गर्दिश-ए-जाम-ए-शराब

मैं भरी महफ़िल में तन्हा हो गया

सलाम मछली शहरी

बे-ख़ुदी सलाम तुझे तेरा शुक्रिया

दुनिया भी मस्त मस्त है उक़्बा भी मस्त मस्त

जावेद सबा
ADVERTISEMENT

कहाँ के माहिर-ओ-कामिल हो तुम हुनर में 'अदील'

तुम्हारे काम तो पर्वरदिगार करता है

अदील ज़ैदी

शुक्रिया तुम ने बुझाया मिरी हस्ती का चराग़

तुम सज़ा-वार नहीं तुम ने तो अच्छाई की

अफ़ीफ़ सिराज