जावेद सबा

ग़ज़ल 12

शेर 16

मुझे तन्हाई की आदत है मेरी बात छोड़ें

ये लीजे आप का घर गया है हात छोड़ें

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ये जो मिलाते फिरते हो तुम हर किसी से हाथ

ऐसा हो कि धोना पड़े ज़िंदगी से हाथ

ये कह के उस ने मुझे मख़मसे में डाल दिया

मिलाओ हाथ अगर वाक़ई मोहब्बत है

गुज़र रही थी ज़िंदगी गुज़र रही है ज़िंदगी

नशेब के बग़ैर भी फ़राज़ के बग़ैर भी

देखे थे जितने ख़्वाब ठिकाने लगा दिए

तुम ने तो आते आते ज़माने लगा दिए

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पुस्तकें 1

कोई देख न ले

 

2013

 

ऑडियो 6

बूंदों की तरह छत से टपकते हुए आ जाओ

तुझ को पाने की ये हसरत मुझे ले डूबेगी

तस्बीह ओ सज्दा-गाह भी सज्दा भी मस्त मस्त

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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