नए साल पर शायरी
यूँ तो हमारी ज़िंदगी में हर दिन अपनी अहमियत रखता है, लेकिन जब एक साल अपने अंत को पहुँचता है और नया साल दस्तक देता है, तो दिल में नई उम्मीदें जाग उठती हैं। हम आने वाले साल से यह अपेक्षा रखते हैं कि वह बीते हुए साल से ज़्यादा सुंदर, सुखद और लाभदायक होगा। तो दोस्तो! आइए इन चयनित शेरों का पाठ करें और प्रेम, ख़ुशी, आशा और भाईचारे की भावना के साथ नए साल का उत्साहपूर्वक स्वागत करें।
देखिए पाते हैं उश्शाक़ बुतों से क्या फ़ैज़
इक बरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है
Interpretation:
Rekhta AI
मिर्ज़ा ग़ालिब इस शेर में ज्योतिष की उम्मीद और प्यार की कठोर सच्चाई की तुलना कर रहे हैं। पंडित जी ने तो कह दिया है कि साल अच्छा है, मगर शायर सोच रहा है कि क्या उस 'अच्छे साल' का असर महबूब की बेरुखी पर भी पड़ेगा? प्रेमी के लिए साल तभी अच्छा माना जाता है जब उसका महबूब उस पर मेहरबान हो, चाहे सितारे कुछ भी कहें।
Interpretation:
Rekhta AI
मिर्ज़ा ग़ालिब इस शेर में ज्योतिष की उम्मीद और प्यार की कठोर सच्चाई की तुलना कर रहे हैं। पंडित जी ने तो कह दिया है कि साल अच्छा है, मगर शायर सोच रहा है कि क्या उस 'अच्छे साल' का असर महबूब की बेरुखी पर भी पड़ेगा? प्रेमी के लिए साल तभी अच्छा माना जाता है जब उसका महबूब उस पर मेहरबान हो, चाहे सितारे कुछ भी कहें।
ये किस ने फ़ोन पे दी साल-ए-नौ की तहनियत मुझ को
तमन्ना रक़्स करती है तख़य्युल गुनगुनाता है
मिरा हाथ देख बरहमना मिरा यार मुझ को मिलेगा कब
तिरे मुँह से निकले ख़ुदा करे इस साल में इसी माह में