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प्रमुखतम आधुनिक शायरों में विख्यात/नई दिशा देने वाले शायर

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ज़फ़र इक़बाल

ग़ज़ल 133

अशआर 155

यहाँ किसी को भी कुछ हस्ब-ए-आरज़ू मिला

किसी को हम मिले और हम को तू मिला

थकना भी लाज़मी था कुछ काम करते करते

कुछ और थक गया हूँ आराम करते करते

झूट बोला है तो क़ाएम भी रहो उस पर 'ज़फ़र'

आदमी को साहब-ए-किरदार होना चाहिए

तुझ को मेरी मुझे तेरी ख़बर जाएगी

ईद अब के भी दबे पाँव गुज़र जाएगी

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अब के इस बज़्म में कुछ अपना पता भी देना

पाँव पर पाँव जो रखना तो दबा भी देना

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हास्य 4

 

पुस्तकें 23

चित्र शायरी 33

वीडियो 18

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हास्य वीडियो

ज़फ़र इक़बाल

Bashir Badr at International Mushaira 2002, Houston

Dr. Basheer Badr reciting at International Mushaira 2002 organised by Aligarh Alumni Association Houston USA ज़फ़र इक़बाल

Bashir Badr reciting at Hind-o-Pak Dosti Aalmi Mushaira 2003, organized by Aligarh Alumni Association Houston, USA.

ज़फ़र इक़बाल

यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो

ज़फ़र इक़बाल

लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में

ज़फ़र इक़बाल

ऑडियो 15

ख़ामुशी अच्छी नहीं इंकार होना चाहिए

परखना मत परखने में कोई अपना नहीं रहता

ये ज़र्द पत्तों की बारिश मिरा ज़वाल नहीं

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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