aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
किसी की ज़ुल्फ़ के सौदे में रात की है बसर
किसी के रुख़ के तसव्वुर में दिन तमाम किया
दम-ब-दम उठती हैं किस याद की लहरें दिल में
दर्द रह रह के ये करवट सी बदलता क्या है
दिल पा के उस की ज़ुल्फ़ में आराम रह गया
दरवेश जिस जगह कि हुई शाम रह गया
परेशाँ हो के दिल तर्क-ए-तअल्लुक़ पर है आमादा
मोहब्बत में ये सूरत भी न रास आई तो क्या होगा
फ़क़त निगाह से होता है फ़ैसला दिल का
न हो निगाह में शोख़ी तो दिलबरी क्या है
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