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लखनऊ के शायर और अदीब

कुल: 353

लखनऊ के अग्रणी क्लासिकी शाइरों में विख्यात/मर्सिया के महान शाइर

प्रमुख मर्सिया-निगार, मसनवी ‘सहर-उल-बयान’ के लिए विख्यात

18वीं सदी के बड़े शायरों में शामिल, मीर तक़ी 'मीर' के समकालीन।

बीसवीं सदी के महत्वपूर्ण विद्वान,लेखक, अनुवादक,उपन्यासकार, नाटककार. लखनऊ की सामाजिक व सांस्कृतिक जीवन के मर्मज्ञ.

प्रसिद्ध अफ़्साना निगार, नाटककार और आलोचक। अपनी कहानी 'मेला घूमनी' के लिए मशहूर

मुमताज़ शाइर, विख्यात संस्कृत विद्वान, साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित

अग्रणी एवं प्रख्यात प्रगतिशील शायर, रोमांटिक और क्रांतिकारी नज़्मों के लिए प्रसिद्ध, ऑल इंडिया रेडियो की पत्रिका “आवाज” के पहले संपादक, मशहूर शायर और गीतकार जावेद अख़्तर के मामा

लखनऊ के प्रसिद्ध शायर, मिर्ज़ा दबीर के सुपुत्र, काव्य विद्या पर अपनी किताब ‘मिक़यासुल अशआर’ के लिए भी प्रसिद्ध

लखनऊ की शास्त्रीय काव्य परंपरा के प्रमुख और प्रतिनिधि शायर, प्रसिद्ध साहित्यकार अमानत लखनवी के पुत्र

मिर्ज़ा ग़ालिब के समकालीन, 19वीं सदी की उर्दू ग़ज़ल का रौशन सितारा।

प्रख्यात प्रगतिशील फ़िक्शन लेखक और पत्रकार - ग़ज़ल विरोधी विचारों के लिए प्रसिद्ध

लखनऊ के मुम्ताज़ और नई राह बनाने वाले शायर/मिर्ज़ा ग़ालिब के समकालीन

सबसे महत्वपूर्ण आधुनिक शायरों में शामिल, अपने नव-क्लासिकी लहजे के लिए विख्यात।

अपनी शायरी में महबूब के साथ मामला-बंदी के मज़मून के लिए मशहूर, नौजवानी में नेत्रहीन हो गए

19 वीं सदी के शायर

अवध के आख़िरी नवाब वाजिद अली शाह के बेटे और युवराज

उर्दू के दो बड़े मर्सिया-गो शाइरों में शामिल

विश्व प्रसिद्ध मसनवी " ज़हर-ए-इश्क़ " के रचयिता

विशिष्ट शैली के कहानीकार, शोधकर्ता और 'ताऊस चमन की मैना' के लेखक

अपने मशहूर शेर 'कह रहा है शोर-ए-दरिया से समंदर का सुकूत…' के लिए जाने जाते हैं

19वीं सदी में लखनऊ के अग्रणी शायरों में से एक, प्रख्यात मसनवी गुलज़ार-ए-नसीम के रचयिता

उर्दू शायरी की विधा ' रेख़्ती ' के लिए प्रसिद्ध जिसमें शायर औरतों की भाषा में बोलता है

अनुवादक, कथाकार और शायर, अपनी किताब फ़साना-ए-आज़ाद के लिए मशहूर

दबिस्तान-ए-लखनऊ के नुमाइंदा शाइरों में शुमार, आतिश के शागिर्द

प्रमुख पूर्वाधुनिक शायर जिन्होंने नई ग़ज़ल के लिए राह बनाई/मिर्ज़ा ग़ालिब के विरोध के लिए प्रसिद्ध

लखनऊ के लोकप्रिय शायर और विद्वान, दाग़ और नातिक़ गुलावठी के शागिर्द. ग़ालिब और हाफ़िज़ के कलम की व्याख्यान की और अनुवाद किया. इसके अलावा उर्दू की क़दीम शायरात (प्राचीन कवयित्रियों) का तज़्किरा भी सम्पादित किया

महान इस्लामी चिंतक और वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली इस्लामी विद्वान

हास्य कवि, कविता-पाठ के ख़ास अंदाज़ के लिए विख्यात।

हनुमान प्रसाद शर्मा अज़ीज़ मातवी उरूज़ के माहिर और अरबी व फ़ारसी के विद्वान हैं

पूर्वाधुनिक शायर, नज़्म और ग़ज़ल दोनों विधाओं में शायरी की; बच्चों के लिए भी बेहतरीन नज़्में लिखीं

प्रसिद्ध शायर और आलोचक, अपनी आलोचना की पुस्तक ‘दो अदबी स्कूल’ के लिए भी जाने जाते हैं

अपने नाटक 'इन्द्र सभा' के लिए प्रसिद्ध, अवध के आख़िरी नवाब वाजिद अली शाह के समकालीन

राष्ट्रीय एकता, धार्मिक एकता और जज़्बा-ए-आज़ादी को समर्पित शायरी के लिए मशहूर , स्वतंत्रता सेनानी

प्रसिद्ध कथाकार, शायर और आलोचक; लखनऊ की सभ्यता और सांस्कृतिक परिदृश्य पर उपन्यास लिखे

अवध के नवाब

लखनऊ की प्रतिष्ठित शायरा जिन्होंने अपनी अभिव्यक्ति में स्त्रीत्व को जगह दी

भारत में समकालीन ग़ज़ल के प्रमुख शायर

प्रमुख तज़किरा-निगार, लेखक

प्रतिष्ठित कवि, कोशकार एवं व्याकरण शास्त्री और भाषा-सुधार के नक़ीब

लखनऊ और रामपूर स्कूल के मिले-जुले रंग में शायरी के लिए माशूहर उत्तर- क्लासिकी शायर

लोकप्रिय शायर, लखनवी भाषा-संस्कृति के नुमाइंदे।

उर्दू के प्रमुख साहित्यिक व्यक्तित्व/मुशायरों के स्तरीय संचालन के लिए प्रसिद्ध

महिलाओं के मुद्दों और बदलती सामाजिक व सांस्कृतिक मूल्यों की अभिव्यक्ति करने वाली कथाकार

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