Yagana Changezi's Photo'

यगाना चंगेज़ी

1884 - 1956 | लखनऊ, भारत

प्रमुख पूर्वाधुनिक शायर जिन्होंने नई ग़ज़ल के लिए राह बनाई/मिर्ज़ा ग़ालिब के विरोध के लिए प्रसिद्ध

प्रमुख पूर्वाधुनिक शायर जिन्होंने नई ग़ज़ल के लिए राह बनाई/मिर्ज़ा ग़ालिब के विरोध के लिए प्रसिद्ध

यगाना चंगेज़ी

ग़ज़ल 70

अशआर 52

गुनाह गिन के मैं क्यूँ अपने दिल को छोटा करूँ

सुना है तेरे करम का कोई हिसाब नहीं

  • शेयर कीजिए

सब्र करना सख़्त मुश्किल है तड़पना सहल है

अपने बस का काम कर लेता हूँ आसाँ देख कर

मुसीबत का पहाड़ आख़िर किसी दिन कट ही जाएगा

मुझे सर मार कर तेशे से मर जाना नहीं आता

दर्द हो तो दवा भी मुमकिन है

वहम की क्या दवा करे कोई

कशिश-ए-लखनऊ अरे तौबा

फिर वही हम वही अमीनाबाद

  • शेयर कीजिए

रुबाई 31

पुस्तकें 37

चित्र शायरी 5

 

वीडियो 5

This video is playing from YouTube

वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

यगाना चंगेज़ी

यगाना चंगेज़ी

ऑडियो 14

अगर अपनी चश्म-ए-नम पर मुझे इख़्तियार होता

अदब ने दिल के तक़ाज़े उठाए हैं क्या क्या

आँख दिखलाने लगा है वो फ़ुसूँ-साज़ मुझे

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

संबंधित शायर

"लखनऊ" के और शायर

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

बोलिए