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अल्ताफ़ हुसैन हाली

1837 - 1914 | दिल्ली, भारत

उर्दू आलोचना के संस्थापकों में शामिल/महत्वपूर्ण पूर्वाधुनिक शायर/मिजऱ्ा ग़ालिब की जीवनी ‘यादगार-ए-ग़ालिब लिखने के लिए प्रसिद्ध

उर्दू आलोचना के संस्थापकों में शामिल/महत्वपूर्ण पूर्वाधुनिक शायर/मिजऱ्ा ग़ालिब की जीवनी ‘यादगार-ए-ग़ालिब लिखने के लिए प्रसिद्ध

अल्ताफ़ हुसैन हाली

ग़ज़ल 28

नज़्म 13

अशआर 48

फ़रिश्ते से बढ़ कर है इंसान बनना

मगर इस में लगती है मेहनत ज़ियादा

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हम जिस पे मर रहे हैं वो है बात ही कुछ और

आलम में तुझ से लाख सही तू मगर कहाँ

माँ बाप और उस्ताद सब हैं ख़ुदा की रहमत

है रोक-टोक उन की हक़ में तुम्हारे ने'मत

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सदा एक ही रुख़ नहीं नाव चलती

चलो तुम उधर को हवा हो जिधर की

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होती नहीं क़ुबूल दुआ तर्क-ए-इश्क़ की

दिल चाहता हो तो ज़बाँ में असर कहाँ

हास्य 1

 

रुबाई 18

क़िस्सा 4

 

लेख 10

पुस्तकें 251

चित्र शायरी 4

 

वीडियो 12

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