अमर अबदाबादी के शेर
मलेंगे आप भी दस्त-ए-तअस्सुफ़
अगर हम को सुकूँ पाने न देंगे
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बता ऐ शम' किस ग़म में जलेगी
अगर जाँ तुझ पे परवाने न देंगे
'इश्क़ और मुश्क छुपाए कहीं छुपते हैं 'अमर'
लाख पर्दा करो दुनिया से ये पर्दा तो नहीं
किस लिए तेज़ हुई जाती है दिल की धड़कन
आप ने देखा है मुझ को कहीं ऐसा तो नहीं
बहुत देखा है हम ने उन का वा'दा
उन्हें अब दिल को बहकाने न देंगे
अपने गिरने का तो अफ़सोस नहीं है मुझ को
देखना ये है किसी ने मुझे देखा तो नहीं
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टैग : रुस्वाई
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