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आमिर मौसवी

1935 | लंदन, यूनाइटेड किंगडम

अपने नौहों और कर्बला के परिदृश्य में लिखी गई नज़्मों और क़तात के लिए जाने जाते हैं

अपने नौहों और कर्बला के परिदृश्य में लिखी गई नज़्मों और क़तात के लिए जाने जाते हैं

ग़ज़ल 8

शेर 2

हम ख़ुदा भी मान लेंगे आप को

आप पहले हो तो जाएँ आदमी

इश्क़ से बाज़ आते हम दीवाने क्या

थी समझ की बात हम समझे नहीं

 

ई-पुस्तक 3

Nazr-o-Niyaz

 

1996

Tar-e-Nafas

 

1977

 

"लंदन" के और शायर

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