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अंजुम आज़मी

1931 - 1990 | कराची, पाकिस्तान

पाकिस्तानी शायर और लेखक, ‘लब ओ रुख़सार’ नाम से मुहब्बत की नज़्मों का संग्रह प्रकाशित हुआ ‘शायरी की ज़बान’ उनके आलोचनात्मक लेखों का संग्रह है

पाकिस्तानी शायर और लेखक, ‘लब ओ रुख़सार’ नाम से मुहब्बत की नज़्मों का संग्रह प्रकाशित हुआ ‘शायरी की ज़बान’ उनके आलोचनात्मक लेखों का संग्रह है

अंजुम आज़मी

ग़ज़ल 14

नज़्म 27

अशआर 13

तुझ से पर्दा नहीं मिरे ग़म का

तू मिरी ज़िंदगी का महरम है

बिठा के सामने तुम को बहार में पी है

तुम्हारे रिंद ने तौबा भी रू-ब-रू कर ली

अब वो जोश-ए-वफ़ा है वो अंदाज़-ए-तलब

अब भी लेकिन तिरे कूचे से गुज़र होता है

कोई तो ख़ैर का पहलू भी निकले

अकेला किस तरह ये शर रहेगा

ख़ाक ने कितने बद-अतवार किए हैं पैदा

ये होते तो उसी ख़ाक से क्या क्या होता

पुस्तकें 7

 

"कराची" के और शायर

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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