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अंजुम बाराबंकवी

1964 | भोपाल, भारत

अंजुम बाराबंकवी

ग़ज़ल 14

शेर 16

मशहूर भी हैं बदनाम भी हैं ख़ुशियों के नए पैग़ाम भी हैं

कुछ ग़म के बड़े इनआ'म भी हैं पढ़िए तो कहानी काम की है

ये बादशाह नहीं है फ़क़ीर है सूरज

हमेशा रात की झोली से दिन निकालता है

जिस बात का मतलब ख़ुश्बू है हर गाँव के कच्चे रस्ते पर

उस बात का मतलब बदलेगा जब पक्की सड़क जाएगी

जो दोस्तों की मोहब्बत से जी नहीं भरता

तो आस्तीन में दो-चार साँप पाल के रख

मुझे सोने की क़ीमत मत बताओ

मैं मिट्टी हूँ मिरी अज़्मत बहुत है

पुस्तकें 6

Dr. Saghar Aazmi Alfaaz Se Aawaz Tak

 

2016

डॉ. बशीर बद्र की शायरी

 

2005

Ghazal Universe

 

2003

Khamoshiyon Ka Nagma

 

2015

Sach Ke Siwa Kuchh Bhi Nahin

 

2011

Zamana Kuchh Aur Hai

 

2010

 

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