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फ़ैज़ लुधियानवी

1911 - 1995 | लाहौर, पाकिस्तान

शेर 3

तू नया है तो दिखा सुब्ह नई शाम नई

वर्ना इन आँखों ने देखे हैं नए साल कई

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अक़्ल गुम है दिल परेशाँ है नज़र बेताब है

जुस्तुजू से भी नहीं मिलता सुराग़-ए-ज़ि़ंदगी

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ग़रीबी किस बला का नाम है उन की बला जाने

ख़ुदा है जिन की दौलत जिन का शेवा ज़र-परस्ती है

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ई-पुस्तक 6

Bachchon Ki Bahar

 

1941

Das Nazmein

 

1940

Qeemti Batein

 

1940

 

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