Farhan Salim's Photo'

फ़रहान सालिम

रामपुर, भारत

ग़ज़ल 15

शेर 13

अब उस मक़ाम पे है मौसमों का सर्द मिज़ाज

कि दिल सुलगने लगे और दिमाग़ जलने लगे

हौसला सब ने बढ़ाया है मिरे मुंसिफ़ का

तुम भी इनआम कोई मेरी सज़ा पर लिख दो

अक्स कुछ बदलेगा आइनों को धोने से

आज़री नहीं आती पत्थरों पे रोने से

ई-पुस्तक 2

Rahe Ye Rah Guzar-e-Shauq

 

1999

Rahe Ye Rahguzar-e-Shauq

 

1999

 

"रामपुर" के और शायर

  • शहरयार शहरयार
  • नोमान शौक़ नोमान शौक़
  • अब्दुल अहद साज़ अब्दुल अहद साज़
  • अर्श मलसियानी अर्श मलसियानी
  • जावेद अख़्तर जावेद अख़्तर
  • अरशद अली ख़ान क़लक़ अरशद अली ख़ान क़लक़
  • कँवर महेंद्र सिंह बेदी सहर कँवर महेंद्र सिंह बेदी सहर
  • ग़ुलाम मुर्तज़ा राही ग़ुलाम मुर्तज़ा राही
  • साक़िब लखनवी साक़िब लखनवी
  • आलम ख़ुर्शीद आलम ख़ुर्शीद