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फ़रहान सालिम

रामपुर, भारत

ग़ज़ल 15

शेर 13

अब उस मक़ाम पे है मौसमों का सर्द मिज़ाज

कि दिल सुलगने लगे और दिमाग़ जलने लगे

हौसला सब ने बढ़ाया है मिरे मुंसिफ़ का

तुम भी इनआम कोई मेरी सज़ा पर लिख दो

अक्स कुछ बदलेगा आइनों को धोने से

आज़री नहीं आती पत्थरों पे रोने से

ई-पुस्तक 1

Rahe Ye Rahguzar-e-Shauq

 

1999

 

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