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महशर इनायती

1909 - 1976 | रामपुर, भारत

रामपूर स्कूल के रंग मे शायरी करने वाले प्रतिष्ठित शायर

रामपूर स्कूल के रंग मे शायरी करने वाले प्रतिष्ठित शायर

ग़ज़ल 21

शेर 13

उन का ग़म उन का तसव्वुर उन की याद

कट रही है ज़िंदगी आराम से

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चले भी आओ मिरे जीते-जी अब इतना भी

इंतिज़ार बढ़ाओ कि नींद जाए

हर एक बात ज़बाँ से कही नहीं जाती

जो चुपके बैठे हैं कुछ उन की बात भी समझो

पुस्तकें 1

Saheba-o-Saman

 

1979

 

ऑडियो 8

ख़ुश हैं बहुत मिज़ाज-ए-ज़माना बदल के हम

तिरे सुलूक-ए-तग़ाफ़ुल से हो के सौदाई

न ग़ैर ही मुझे समझो न दोस्त ही समझो

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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