Akbar Ali Khan Arshi Zadah's Photo'

अकबर अली खान अर्शी जादह

1939 - 1997 | रामपुर, भारत

शायर और शोधकर्ता, ग़ालिब के दीवान और उनके पत्रों के हवाले से कई शोधपूर्ण कार्य किये

शायर और शोधकर्ता, ग़ालिब के दीवान और उनके पत्रों के हवाले से कई शोधपूर्ण कार्य किये

अकबर अली खान अर्शी जादह

ग़ज़ल 14

शेर 23

लूटा जो उस ने मुझ को तो आबाद भी किया

इक शख़्स रहज़नी में भी रहबर लगा मुझे

मैं तुझ को भूल पाऊँ यही सज़ा है मिरी

मैं अपने-आप से लेता हूँ इंतिक़ाम अपना

वही मायूसी का आलम वही नौमीदी का रंग

ज़िंदगी भी किसी मुफ़्लिस की दुआ हो जैसे

ये पड़ी हैं सदियों से किस लिए तिरे मेरे बीच जुदाइयाँ

कभी अपने घर तू मुझे बुला कभी रास्ते मिरे घर के देख

अजीब उस से तअ'ल्लुक़ है क्या कहा जाए

कुछ ऐसी सुल्ह नहीं है कुछ ऐसी जंग नहीं

पुस्तकें 3

Nuskha-e-Arshi Zada

 

1969

सुख़न मेरे तुम्हारे दरमियान

 

1998

Sukhan Mere Tumhare Darmiyan

 

1998

 

"रामपुर" के और शायर

  • मुनीर शिकोहाबादी मुनीर शिकोहाबादी
  • निज़ाम रामपुरी निज़ाम रामपुरी
  • अज़हर इनायती अज़हर इनायती
  • सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम
  • महशर इनायती महशर इनायती
  • उरूज क़ादरी उरूज क़ादरी
  • मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
  • ताहिर फ़राज़ ताहिर फ़राज़
  • जावेद नसीमी जावेद नसीमी
  • फ़रहान सालिम फ़रहान सालिम