ग़ज़ल 12

शेर 7

तिरा दीदार हो आँखें किसी भी सम्त देखें

सो हर चेहरे में अब तेरी शबाहत चाहिए है

नहीं होती है राह-ए-इश्क़ में आसान मंज़िल

सफ़र में भी तो सदियों की मसाफ़त चाहिए है

मेरा हर ख़्वाब तो बस ख़्वाब ही जैसा निकला

क्या किसी ख़्वाब की ताबीर भी हो सकती है

ढूँडेंगे हर इक चीज़ में जीने की उमंगें

दिल की किसी ख़्वाहिश को भी मारेंगे नहीं हम

दिल ऐसा मकाँ है जो अगर टूट गया तो

लग जाएँगी सदियाँ नई तामीर में लिख दे

पुस्तकें 1

Sare Khwab Uske Hain

 

2010

 

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