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हनीफ़ तरीन

1951 - 2020 | दिल्ली, भारत

हनीफ़ तरीन

ग़ज़ल 11

शेर 7

बस्ती के हस्सास दिलों को चुभता है

सन्नाटा जब सारी रात नहीं होता

महफ़िल में फूल ख़ुशियों के जो बाँटता रहा

तन्हाई में मिला तो बहुत ही उदास था

पानी ने जिसे धूप की मिट्टी से बनाया

वो दाएरा-ए-रब्त बिगड़ने के लिए था

रिश्ते नाते टूटे फूटे लगे हैं

जब भी अपना साया साथ नहीं होता

हर ज़ख़्म-ए-कोहना वक़्त के मरहम ने भर दिया

वो दर्द भी मिटा जो ख़ुशी की असास था

पुस्तकें 13

अबाबीलें नहीं आयीं

 

2006

Dalit Kaveeta Jaag Uthi

 

2018

हनीफ़ तरीन

फ़न और शख़्सियत

2004

Kisht-e-Ghazal Numa

 

1999

किताब-ए-सेहरा

 

1995

Lala-e-Sehraee

 

2014

लाला-ए-सेहराई

 

2014

मैंने ज़िल्ज़ाल को लफ़्ज़ों में उतर कर देखा

 

 

Rabab-e-Sahra

 

1992

रु-ए-शमीम से नुज़्हत इश्क़ की बहती है

 

2012

"दिल्ली" के और शायर

  • फ़रहत एहसास फ़रहत एहसास
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