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जौन एलिया

1931 - 2002 | कराची, पाकिस्तान

पाकिस्तान के अग्रणी आधुनिक शायरों में से एक, अपने अपारम्परिक अंदाज़ के लिए मशहूर।

पाकिस्तान के अग्रणी आधुनिक शायरों में से एक, अपने अपारम्परिक अंदाज़ के लिए मशहूर।

ग़ज़ल

कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे

जौन एलिया

कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे

फ़हद हुसैन

जुज़ गुमाँ और था ही क्या मेरा

जौन एलिया

इक ज़ख़्म भी यारान-ए-बिस्मिल नहीं आने का

नोमान शौक़

ऐ वस्ल कुछ यहाँ न हुआ कुछ नहीं हुआ

नोमान शौक़

क्या कहें तुम से बूद-ओ-बाश अपनी

नोमान शौक़

क्या हो गया है गेसू-ए-ख़मदार को तिरे

नोमान शौक़

कोई दम भी मैं कब अंदर रहा हूँ

नोमान शौक़

ख़ूब है शौक़ का ये पहलू भी

नोमान शौक़

तुझ में पड़ा हुआ हूँ हरकत नहीं है मुझ में

नोमान शौक़

दिल ने किया है क़स्द-ए-सफ़र घर समेट लो

नोमान शौक़

दिल-ए-बर्बाद को आबाद किया है मैं ने

नोमान शौक़

यादों का हिसाब रख रहा हूँ

नोमान शौक़

लाज़िम है अपने आप की इमदाद कुछ करूँ

नोमान शौक़

शाम हुई है यार आए हैं यारों के हमराह चलें

नोमान शौक़

सोचा है कि अब कार-ए-मसीहा न करेंगे

नोमान शौक़

हम तो जैसे वहाँ के थे ही नहीं

नोमान शौक़

हमारे ज़ख़्म-ए-तमन्ना पुराने हो गए हैं

नोमान शौक़

नज़्म

क़ातिल

नोमान शौक़

दरीचा-हा-ए-ख़याल

नोमान शौक़

नाकारा

नोमान शौक़

फ़न पारा

नोमान शौक़

रातें सच्ची हैं दिन झूटे हैं

नोमान शौक़

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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