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ममनून निज़ामुद्दीन

? - 1844 | दिल्ली, भारत

ग़ज़ल 14

शेर 8

ये जाने थे कि उस महफ़िल में दिल रह जाएगा

हम ये समझे थे चले आएँगे दम भर देख कर

i did not know that at her place my heart would choose to stay

I had thought a moments glance and we would come away

i did not know that at her place my heart would choose to stay

I had thought a moments glance and we would come away

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कल वस्ल में भी नींद आई तमाम शब

एक एक बात पर थी लड़ाई तमाम शब

ख़्वाब में बोसा लिया था रात ब-लब-ए-नाज़की

सुब्ह दम देखा तो उस के होंठ पे बुतख़ाला था

ई-पुस्तक 3

Kulliyat-e-Mamnoon

Volume-001

1972

Mukhtar Ashaar

Volume-001

1896

Mutala Meer Nizamuddin Mamnoon

Hayat Shakhsiyat Aur Shayari

1972

 

ऑडियो 10

कब गुल है हवा-ख़्वाह सबा अपने चमन का

कल वस्ल में भी नींद न आई तमाम शब

कोई हमदर्द न हमदम न यगाना अपना

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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