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आलोचक और शायर

आलोचक और शायर

ग़ज़ल 8

शेर 6

मालूम नहीं नींद किसे कहते हैं लेकिन

करता तो हूँ इक काम मैं सोने की तरह का

कुछ दिनों दश्त भी आबाद हुआ चाहता है

कुछ दिनों के लिए अब शहर को वीरानी दे

कभी तो यूँ कि मकाँ के मकीं नहीं होते

कभी कभी तो मकीं का मकाँ नहीं होता

लेख 1

 

पुस्तकें 9

बाज़याफ़्त

 

2005

ग़ज़ाल-ए-शब

 

2013

Kulliyat-e-Ghulam Abbas

 

2016

Mazameen-e-Shaukat

 

2015

Phool Hatheli Par

 

2011

तअस्सुबात और तन्क़ीद

 

2014

Tabeer-o-Tafheem

 

2003

Taraqqi Pasandi, Jadidiyat,Ma-Baad-e-Jadeediyat

 

2002

Tohfa-e-Atfal

 

2011

 

"कोलकाता" के और शायर

  • वहशत रज़ा अली कलकत्वी वहशत रज़ा अली कलकत्वी
  • एज़ाज़ अफ़ज़ल एज़ाज़ अफ़ज़ल
  • अब्बास अली ख़ान बेखुद अब्बास अली ख़ान बेखुद
  • फ़े सीन एजाज़ फ़े सीन एजाज़
  • अमीर रज़ा मज़हरी अमीर रज़ा मज़हरी
  • फ़राग़ रोहवी फ़राग़ रोहवी
  • जुर्म मुहम्मदाबादी जुर्म मुहम्मदाबादी
  • जाफ़र साहनी जाफ़र साहनी
  • इमाम अाज़म इमाम अाज़म
  • रोहित सोनी ताबिश रोहित सोनी ताबिश