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तौसीफ़ तबस्सुम

1928 | इस्लामाबाद, पाकिस्तान

ग़ज़ल 19

शेर 10

दिल की बाज़ी हार के रोए हो तो ये भी सुन रक्खो

और अभी तुम प्यार करोगे और अभी पछताओगे

अच्छा है कि सिर्फ़ इश्क़ कीजे

ये उम्र तो यूँ भी राएगाँ है

पाँव में लिपटी हुई है सब के ज़ंजीर-ए-अना

सब मुसाफ़िर हैं यहाँ लेकिन सफ़र में कौन है

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ई-पुस्तक 7

Pachaas Afsane

 

2009

Pakistani Adab

 

1992

 

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