ग़ज़ल 19

शेर 10

दिल की बाज़ी हार के रोए हो तो ये भी सुन रक्खो

और अभी तुम प्यार करोगे और अभी पछताओगे

शौक़ कहता है कि हर जिस्म को सज्दा कीजे

आँख कहती है कि तू ने अभी देखा क्या है

पाँव में लिपटी हुई है सब के ज़ंजीर-ए-अना

सब मुसाफ़िर हैं यहाँ लेकिन सफ़र में कौन है

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अच्छा है कि सिर्फ़ इश्क़ कीजे

ये उम्र तो यूँ भी राएगाँ है

देखने वाली अगर आँख को पहचान सकें

रंग ख़ुद पर्दा-ए-तस्वीर से बाहर हो जाएँ

पुस्तकें 4

Gulbang-e-Wafa

 

1998

जंग-ए-अाज़ादी 1857 का मुज़ाहिद शायर

मीर मोहम्मद इस्माईल हुसैन मुनीर सिकोहाबादी

2006

Pachaas Afsane

 

2009

Pakistani Adab

 

1992

 

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