आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "zain"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "zain"
ग़ज़ल
सब से बेहतर है कि मुझ पर मेहरबाँ कोई न हो
हम-नशीं कोई न हो और राज़-दाँ कोई न हो
ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़
ग़ज़ल
सब से बेहतर है कि मुझ पर मेहरबाँ कोई न हो
हम-नशीं कोई न हो और राज़दाँ कोई न हो
ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़
शेर
तुम अपनी ज़ुल्फ़ से पूछो मिरी परेशानी
कि हाल उस को है मालूम हू-ब-हू मेरा
ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़
पृष्ठ के संबंधित परिणाम "zain"
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
अन्य परिणाम "zain"
मर्सिया
अर्श के नूरी ज़मीं के फ़र्श पर आने को हैं
और इक ख़ाकी को सैर-ए-ख़ुल्द दिखलाने को हैं
ख़ुशी मोहम्मद नाज़िर
शेर
तेरे कहने से मैं अब लाऊँ कहाँ से नासेह
सब्र जब इस दिल-ए-मुज़्तर को ख़ुदा ने न दिया
ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़
शेर
कर दिया तीरों से छलनी मुझे सारा लेकिन
ख़ून होने के लिए उस ने जिगर छोड़ दिया
ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़
शेर
वो पर्दा-नशीनी की रिआयत है तुम्हारी
हम बात भी ख़ल्वत से निकलने नहीं देते
ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़
हास्य
हम भी उन्हीं दमों के हमेशा से फ़ैन हैं
इज़्ज़त हैं ख़ानदाँ की जो महफ़िल की ज़ैन हैं
साग़र ख़य्यामी
नज़्म
ज़िंदगी सीटियाँ बजाती है
ये साँसों के चलने को क्यों ज़िंदगी की अलामत कहा है
ये साँसें तो मुफ़्लिस की भी चल रही हैं
ज़ैन अब्बास
ग़ज़ल
क्यूँ आईने में देखा तू ने जमाल अपना
देखा तो ख़ैर देखा पर दिल सँभाल अपना
ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़
ग़ज़ल
मर जाएँगे लेकिन कभी उल्फ़त न करेंगे
हम जीने को अपने ये मुसीबत न करेंगे
ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़
ग़ज़ल
अच्छा हुआ कि दम शब-ए-हिज्राँ निकल गया
दुश्वार था ये काम पर आसाँ निकल गया
ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़
ग़ज़ल
उस पे करना मिरे नालों ने असर छोड़ दिया
मुझ को एक लुत्फ़ की कर के जो नज़र छोड़ दिया












