गया शैतान मारा एक सज्दे के न करने में
अगर लाखों बरस सज्दे में सर मारा तो क्या मारा
Interpretation:
Rekhta AI
कवि कहते हैं कि ईश्वर की आज्ञा का पालन करना सालों की तपस्या से ज़्यादा ज़रूरी है। शैतान ने लाखों साल भक्ति की, लेकिन जब उसने अहंकार में आकर एक हुक्म नहीं माना, तो उसकी सारी मेहनत बेकार हो गई। यह शेर बताता है कि घमंड इंसान की सारी अच्छाइयों को मिटा देता है।
बहुत शर्मिंदा हूँ इबलीस से मैं
ख़ता मेरी सज़ा उस को मिली है
कितनी दुश्वार है पीरान-ए-हरम की मंज़िल
इस तरफ़ फ़ित्ना-ए-इब्लीस उधर रब्ब-ए-जलील
जो मुँह दिखाई की रस्मों पे है मुसिर इबलीस
छुपेंगी हज़रत-ए-हवा की बेटियाँ कब तक
तेरा आधा काम ख़ुद इंसान ही करने लगे
काम तेरा अब तो ऐ शैतान आधा रह गया
सर अपना उठा सकता नहीं कोई भी इबलीस
मिल जाए अगर फ़क़्र की तलवार मुझे भी
जो मुझ में छुपा मेरा गला घोंट रहा है
या वो कोई इबलीस है या मेरा ख़ुदा है
हम-साए में शैतान भी रहता है ख़ुदा भी
जन्नत भी मयस्सर है जहन्नम की हवा भी
इबलीस भी रख लेते हैं जब नाम फ़रिश्ते
मैं क्यूँ न कहूँ मुझ से भी हैं ख़ाम फ़रिश्ते
खुला ये आदम-ओ-इबलीस के फ़साने से
कि ये जहान बना है फ़रेब खाने से
अल्लाह को पा-मर्दी-ए-मोमिन पे भरोसा
इबलीस को यूरोप की मशीनों का सहारा
इबलीस ख़ंदा-ज़न है मज़ाहिब की लाश पर
पैग़ंबरान-ए-दहर की पैग़म्बरी की ख़ैर
तू न करना मग़रिबी मतवालियों की रेस देख
घात में तेरी लगा है फ़ित्ना-ए-इब्लीस देख
कह रहा इबलीस अब शैतान से
फ़िक्र-ए-फ़र्दा छीन इस इंसान से