दिल छू लेने वाली इमोशनल शायरी

वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना हो मुमकिन

उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा

साहिर लुधियानवी

शाम के साए में जैसे पेड़ का साया मिले

मेरे मिटने का तमाशा देखने की चीज़ थी

लियाक़त अली आसिम

इक शाम के साए तले बैठे रहे वो देर तक

आँखों से की बातें बहुत मुँह से कहा कुछ भी नहीं

बशीर बद्र

अब मिरा दर्द मिरी जान हुआ जाता है

मिरे चारागरो अब मुझे अच्छा करो

शहज़ाद अहमद

अभी तो अच्छी लगेगी कुछ दिन जुदाई की रुत

अभी हमारे लिए ये सब कुछ नया नया है

शारिक़ कैफ़ी

अंजान तुम बने रहे ये और बात है

ऐसा तो क्या है तुम को हमारी ख़बर हो

अज्ञात

जलती रुतो गवाह रहना

हम नंगे पाँव चल रहे हैं

अख़्तर होशियारपुरी

सिपाह-ए-शाम के नेज़े पे आफ़्ताब का सर

किस एहतिमाम से परवर-दिगार-ए-शब निकला

इफ़्तिख़ार आरिफ़

भीक दे कर जाने क्या लेंगे

इक भिकारन डरी डरी सोचे

प्रेम भण्डारी

चलो 'आसी' अभी वापस चलें घर

अभी तो शाम होती जा रही है

इक़बाल अासी