ग़ज़ल 19

नज़्म 1

 

शेर 21

मोहब्बत करने वाले दर्द में तन्हा नहीं होते

जो रूठोगे कभी मुझ से तो अपना दिल दुखाओगे

मैं जी भर के रोया तो आराम आया

मिरा ग़म ही आख़िर मिरे काम आया

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दुख पे मेरे रो रहा था जो बहुत

जाते जाते कह गया अच्छा हुआ

वीडियो 4

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शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
किधर का था किधर का हो गया हूँ

आज़िम कोहली

ज़र्फ़ है किस में कि वो सारा जहाँ ले कर चले

आज़िम कोहली

वफ़ा और इश्क़ के रिश्ते बड़े ख़ुश-रंग होते हैं

वफ़ा और इश्क़ के रिश्ते बड़े ख़ुश-रंग होते हैं आज़िम कोहली

हो सितम कैसा भी अब हालात की शमशीर का

आज़िम कोहली

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