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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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Abbas Tabish's Photo'

अब्बास ताबिश

1961 | लाहौर, पाकिस्तान

प्रख्यात पाकिस्तानी शायर जो मुशायरों में भी लोकप्रिय हैं।

प्रख्यात पाकिस्तानी शायर जो मुशायरों में भी लोकप्रिय हैं।

अब्बास ताबिश

ग़ज़ल 135

नज़्म 8

अशआर 65

एक मुद्दत से मिरी माँ नहीं सोई 'ताबिश'

मैं ने इक बार कहा था मुझे डर लगता है

ये मोहब्बत की कहानी नहीं मरती लेकिन

लोग किरदार निभाते हुए मर जाते हैं

जिस से पूछें तिरे बारे में यही कहता है

ख़ूबसूरत है वफ़ादार नहीं हो सकता

हम हैं सूखे हुए तालाब पे बैठे हुए हंस

जो तअल्लुक़ को निभाते हुए मर जाते हैं

चाँद-चेहरे मुझे अच्छे तो बहुत लगते हैं

इश्क़ मैं उस से करूँगा जिसे उर्दू आए

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