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अहमद महफ़ूज़

1966 | दिल्ली, भारत

प्रसिद्ध आलोचक और शायर, मीर तक़ी मीर पर आलोचनात्मक लेखन के लिए मशहूर. जामिया मिलिया इस्लामिया के उर्दू विभाग से सम्बद्ध

प्रसिद्ध आलोचक और शायर, मीर तक़ी मीर पर आलोचनात्मक लेखन के लिए मशहूर. जामिया मिलिया इस्लामिया के उर्दू विभाग से सम्बद्ध

अहमद महफ़ूज़

ग़ज़ल 24

अशआर 23

सुना है शहर का नक़्शा बदल गया 'महफ़ूज़'

तो चल के हम भी ज़रा अपने घर को देखते हैं

बिछड़ के ख़ाक हुए हम तो क्या ज़रा देखो

ग़ुबार जा के उसी कारवाँ से मिलता है

कहाँ किसी को थी फ़ुर्सत फ़ुज़ूल बातों की

तमाम रात वहाँ ज़िक्र बस तुम्हारा था

नहीं आसमाँ तिरी चाल में नहीं आऊँगा

मैं पलट के अब किसी हाल में नहीं आऊँगा

उस से मिलना और बिछड़ना देर तक फिर सोचना

कितनी दुश्वारी के साथ आए थे आसानी में हम

लेख 1

 

पुस्तकें 6

 

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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