Ajmal Siddiqui's Photo'

अजमल सिद्दीक़ी

1981 | दिल्ली, भारत

ग़ज़ल 10

शेर 11

बोल पड़ता तो मिरी बात मिरी ही रहती

ख़ामुशी ने हैं दिए सब को फ़साने क्या क्या

क्या क्या पढ़ा इस मकतब में, कितने ही हुनर सीखे हैं यहाँ

इज़हार कभी आँखों से किया कभी हद से सिवा बेबाक हुआ

बाज़ार में इक चीज़ नहिं काम की मेरे

ये शहर मिरी जेब का रखता है भरम ख़ूब

संबंधित शायर

  • अभिषेक शुक्ला अभिषेक शुक्ला समकालीन

"दिल्ली" के और शायर

  • शैख़  ज़हूरूद्दीन हातिम शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम
  • फ़रहत एहसास फ़रहत एहसास
  • हसरत मोहानी हसरत मोहानी
  • बेख़ुद देहलवी बेख़ुद देहलवी
  • राजेन्द्र मनचंदा बानी राजेन्द्र मनचंदा बानी
  • आबरू शाह मुबारक आबरू शाह मुबारक