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अनवर देहलवी

1847 - 1885 | दिल्ली, भारत

उत्तर-क्लासिकी शायर, ज़ौक़ और ग़ालिब के शिष्य अपने सर्वाधिक लोकप्रिय शेरों के लिए प्रसिद्ध

उत्तर-क्लासिकी शायर, ज़ौक़ और ग़ालिब के शिष्य अपने सर्वाधिक लोकप्रिय शेरों के लिए प्रसिद्ध

ग़ज़ल 10

शेर 26

मैं समझा आप आए कहीं से

पसीना पोछिए अपनी जबीं से

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शर्म भी इक तरह की चोरी है

वो बदन को चुराए बैठे हैं

उन से हम लौ लगाए बैठे हैं

आग दिल में दबाए बैठे हैं

ई-पुस्तक 2

Deewan-e-Anwar

Nazm-e-Dilfareb

 

नज़्म-ए-दिल फ़रोज़

दीवान-ए-अनवर

1899

 

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