ग़ज़ल 16

नज़्म 4

 

शेर 7

मुझ को तलाश करते हो औरों के दरमियाँ

हैरान हो रहा हूँ तुम्हारे गुमान पर

वो आए तो लगा ग़म का मुदावा हो गया है

मगर ये क्या कि ग़म कुछ और गहरा हो गया है

कभी उन का नहीं आना ख़बर के ज़ैल में था

मगर अब उन का आना ही तमाशा हो गया है

पुस्तकें 2

धूप के पौदे

 

2008

Safar-e-Khama

Yagaana Rawi Se Kaj-Kulaahi Tak

2016

 

ऑडियो 16

ऐ दिल तिरे तुफ़ैल जो मुझ पर सितम हुए

ऐ दिल तिरे तुफ़ैल जो मुझ पर सितम हुए

कभी जो उस की तमन्ना ज़रा बिफर जाए

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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