अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ
ग़ज़ल 15
अशआर 6
ऐ शैख़ अगर कुफ़्र से इस्लाम जुदा है
पस चाहिए तस्बीह में ज़ुन्नार न होता
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ऑडियो 11
अक्स भी कब शब-ए-हिज्राँ का तमाशाई है
अगर आशिक़ कोई पैदा न होता
आलम में अगर इश्क़ का बाज़ार न होता
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