ग़ज़ल 6

शेर 8

चाहिए क्या तुम्हें तोहफ़े में बता दो वर्ना

हम तो बाज़ार के बाज़ार उठा लाएँगे

यूँ मोहब्बत से हम ख़ाना-ब-दोशों को बुला

इतने सादा हैं कि घर-बार उठा लाएँगे

हाँ तुझे भी तो मयस्सर नहीं तुझ सा कोई

है तिरा अर्श भी वीराँ मिरे पहलू की तरह

तराश और भी अपने तसव्वुर-ए-रब को

तिरे ख़ुदा से तो बेहतर मिरा सनम है अभी

क्या क्या प्यास जागे मिरे दिल के दश्त में

हसरत भी एक आग है लागे जो रात भर

पुस्तकें 1

Barish Mein Shareek

 

2012

 

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